श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 2: छोटे हरिदास को दण्ड  »  श्लोक 131
 
 
श्लोक  3.2.131 
शुनिया कहेन प्रभु, - “शुनह, गोसा ञि ।
सब वैष्णव ल ञा तुमि रह एइ ठाञि” ॥131॥
 
 
अनुवाद
यह निवेदन सुनकर श्री चैतन्य महाप्रभु ने उत्तर दिया, "हे प्रभु, कृपया मेरी बात सुनिए। आपके लिए सभी वैष्णवों के साथ यहाँ रहना ही श्रेयस्कर है।"
 
Hearing this request, Sri Chaitanya Mahaprabhu replied, "O Lord, please listen to me. It would be better for you to stay here with all the Vaishnavas.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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