| श्री चैतन्य चरितामृत » लीला 3: अन्त्य लीला » अध्याय 2: छोटे हरिदास को दण्ड » श्लोक 120 |
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| | | | श्लोक 3.2.120  | क्षुद्र - जीव सब मकर् ट - वैराग्य करिया ।
इन्द्रिय चराञा बुले ‘प्रकृति’ सम्भाषिया ॥120॥ | | | | | | | अनुवाद | | "बहुत से लोग ऐसे हैं जिनके पास बहुत कम है, फिर भी वे बंदरों की तरह संन्यासी जीवन अपना लेते हैं। वे इधर-उधर भटकते रहते हैं, इंद्रिय-तृप्ति में लीन रहते हैं और स्त्रियों से अंतरंग बातें करते हैं।" | | | | "There are many such petty people, without any possessions, who embrace the renunciation of monkeys. They wander about, indulging in sense gratification and intimate intercourse with women." | | ✨ ai-generated | | |
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