| श्री चैतन्य चरितामृत » लीला 3: अन्त्य लीला » अध्याय 2: छोटे हरिदास को दण्ड » श्लोक 110 |
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| | | | श्लोक 3.2.110  | उत्तम अन्न एत तण्डुल काँहाते पाइला ? ।
आचार्य कहे , - माधवी - पाश मागिया आनिला ॥110॥ | | | | | | | अनुवाद | | भगवान ने पूछा, "इतने बढ़िया चावल तुम्हें कहाँ से मिले?" भगवान आचार्य ने उत्तर दिया, "मुझे ये माधवीदेवी से भिक्षा माँगकर मिले हैं।" भगवान आचार्य ने उत्तर दिया, "मुझे ये माधवीदेवी से भिक्षा माँगकर मिले हैं।" | | | | Mahaprabhu asked, “Where did you get such fine rice?” The Lord Acharya replied, “I asked Madhavidevi for it.” | | ✨ ai-generated | | |
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