श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 2: छोटे हरिदास को दण्ड  »  श्लोक 108
 
 
श्लोक  3.2.108 
स्नेहे रान्धिल प्रभुर प्रिय ये व्यञ्जन ।
देउल प्रसाद, आदा - चाकि, लेम्बु - सलवण ॥108॥
 
 
अनुवाद
भगवान आचार्य ने बड़े प्रेम से श्री चैतन्य महाप्रभु को प्रिय अनेक प्रकार की सब्ज़ियाँ और अन्य व्यंजन पकाए। उन्होंने भगवान जगन्नाथ से बचे हुए अन्न और पिसी हुई अदरक तथा नमक युक्त चूना जैसी पाचन सहायक वस्तुएँ भी प्राप्त कीं।
 
The Lord Acharya lovingly prepared a variety of vegetables and other dishes that Sri Chaitanya Mahaprabhu loved. He also received Jagannatha's prasad and digestives such as ground ginger, lemon, and salt.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd