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श्लोक 3.2.103  |
“मोर नामे शिखि - माहितिर भगिनी - स्थाने गिया ।
शुक्ल - चाउल एक मान आनह मागिया” ॥103॥ |
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| अनुवाद |
| "कृपया शिखी माहिती की बहन के पास जाओ। मेरे नाम पर उससे एक मन सफेद चावल माँगकर यहाँ ले आओ।" |
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| "Go to Shikhimahiti's sister. Ask her for a maund of white rice in my name and bring it here." |
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