श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 2: छोटे हरिदास को दण्ड  »  श्लोक 103
 
 
श्लोक  3.2.103 
“मोर नामे शिखि - माहितिर भगिनी - स्थाने गिया ।
शुक्ल - चाउल एक मान आनह मागिया” ॥103॥
 
 
अनुवाद
"कृपया शिखी माहिती की बहन के पास जाओ। मेरे नाम पर उससे एक मन सफेद चावल माँगकर यहाँ ले आओ।"
 
"Go to Shikhimahiti's sister. Ask her for a maund of white rice in my name and bring it here."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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