श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 19: श्री चैतन्य महाप्रभु का अचिन्त्य व्यवहार  »  श्लोक 94
 
 
श्लोक  3.19.94 
नेत्र - नाभि, वदन, कर - युग चरण ,
एइ अष्ट - पद्म कृष्ण - अङ्गे ।
कर्पूर - लिप्त कमल, तार यैछे परिमल ,
सेइ गन्ध अष्ट - पद्म - सङ्गे ॥94॥
 
 
अनुवाद
"कृष्ण के नेत्र, नाभि, मुख, हाथ और पैर उनके शरीर पर आठ कमल के फूलों के समान हैं। उन आठ कमलों से कपूर और कमल के मिश्रण जैसी सुगंध निकलती है। यही उनके शरीर से जुड़ी गंध है।"
 
Krishna's eyes, navel, mouth, hands, and feet are like eight lotus flowers on his body. These eight lotuses emit a fragrance of camphor and lotus. This fragrance is associated with his body.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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