श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 19: श्री चैतन्य महाप्रभु का अचिन्त्य व्यवहार  »  श्लोक 90
 
 
श्लोक  3.19.90 
कृष्ण - गन्ध - लुब्धा राधा सखीरे ये कहिला ।
सेइ श्लोक प ड़ि’ प्रभु अर्थ करिला ॥90॥
 
 
अनुवाद
श्रीमती राधारानी ने एक बार अपनी गोपी सखियों को एक श्लोक सुनाया जिसमें बताया कि किस प्रकार वे कृष्ण के शरीर की दिव्य सुगंध के लिए लालायित रहती हैं। श्री चैतन्य महाप्रभु ने उसी श्लोक को सुनाया और उसका अर्थ स्पष्ट किया।
 
Srimati Radharani once told her gopi friends how she yearned for the divine fragrance of Krishna's body. Sri Chaitanya Mahaprabhu recited the same verse and explained its meaning.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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