श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 19: श्री चैतन्य महाप्रभु का अचिन्त्य व्यवहार  »  श्लोक 84
 
 
श्लोक  3.19.84 
“ललित - लवङ्ग - लता” पद गाओया ञा ।
नृत्य करि’ बुलेन प्रभु निज - गण ल ञा ॥84॥
 
 
अनुवाद
इस वातावरण में भगवान ने अपने सहयोगियों से गीत-गोविन्द का श्लोक गवाया, जिसका आरंभ "ललिता-लवंग-लता" शब्दों से होता था, और वे उनके साथ नृत्य करते और विचरण करते थे।
 
In this atmosphere, Mahaprabhu asked his companions to sing the verse of 'Geet Govind' starting with 'Lalit Lavangalata' and he himself started dancing and moving around with them.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd