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श्लोक 3.19.68  |
प्रभु - पाद - तले शङ्कर करेन शयन ।
प्रभु ताँर उपर करेन पाद - प्रसारण ॥68॥ |
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| अनुवाद |
| इस प्रकार शंकर पंडित श्री चैतन्य महाप्रभु के चरणों में लेट गए और भगवान ने अपने पैर शंकर के शरीर पर रख दिए। |
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| In this way Shankar Pandit would lie down near the feet of Sri Chaitanya Mahaprabhu and Mahaprabhu would place his feet on Shankar's body. |
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