श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 19: श्री चैतन्य महाप्रभु का अचिन्त्य व्यवहार  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  3.19.62 
प्रभुरे शय्याते आनि’ सुस्थिर कराइला ।
‘काँहे कैला एइ तुमि?’ - स्वरूप पुछिला ॥62॥
 
 
अनुवाद
वे प्रभु को उनके बिस्तर पर ले गए, उन्हें शांत किया और फिर पूछा, “आपने अपने साथ ऐसा क्यों किया?”
 
They brought Mahaprabhu to his bed, calmed him down and then asked, “What have you done to yourself?”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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