श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 19: श्री चैतन्य महाप्रभु का अचिन्त्य व्यवहार  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  3.19.56 
प्रभुरे शोयाञा रामानन्द गेला घरे ।
स्वरूप, गोविन्द शुइला गम्भीरार द्वारे ॥56॥
 
 
अनुवाद
भगवान के शयन के पश्चात् रामानन्द राय घर लौट आये और स्वरूप दामोदर तथा गोविन्द गम्भीरा के द्वार पर लेट गये।
 
When Mahaprabhu was put to sleep, Ramanand Rai went to his home and lay down at the door of Swaroop Damodar and Govind Gambhira.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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