श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 19: श्री चैतन्य महाप्रभु का अचिन्त्य व्यवहार  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  3.19.54 
तबे स्वरूप - राम - राय, करि’ नाना उपाय
महाप्रभुर करे आश्वासन ।
गायेन सङ्गम - गीत, प्रभुर फिराइला चित
प्रभुर किछु स्थिर हैल मन ॥54॥
 
 
अनुवाद
तब स्वरूप दामोदर और रामानन्द राय ने भगवान को प्रसन्न करने के लिए अनेक उपाय सोचे। उन्होंने मिलन के गीत गाए जिससे भगवान का हृदय परिवर्तित हो गया और उनका मन शांत हो गया।
 
Then Swarup Damodara and Ramanand Rai tried various means to console Mahaprabhu. They sang songs of reconciliation, which transformed his heart and calmed his mind.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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