श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 19: श्री चैतन्य महाप्रभु का अचिन्त्य व्यवहार  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  3.19.34 
पूर्वे येन विशाखारे राधिका पुछिला ।
सेइ श्लोक प ड़ि’ प्रलाप करिते लागिला ॥34॥
 
 
अनुवाद
जैसे ही श्रीमती राधारानी ने अपनी सखी विशाखा से पूछा, श्री चैतन्य महाप्रभु उसी श्लोक को पढ़ते हुए पागलों की तरह बोलने लगे।
 
Just as Srimati Radharani had asked her personal friend Visakha, Sri Chaitanya Mahaprabhu also recited the same verse and started speaking like a madman.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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