श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 19: श्री चैतन्य महाप्रभु का अचिन्त्य व्यवहार  »  श्लोक 103
 
 
श्लोक  3.19.103 
अलौकिक कृष्ण - लीला, दिव्य - शक्ति तार ।
तकर्ेर गोचर नहे चरित्र याहार ॥103॥
 
 
अनुवाद
भगवान कृष्ण की लीलाएँ असाधारण रूप से दिव्य शक्ति से परिपूर्ण हैं। ऐसी लीलाओं की विशेषता यह है कि वे प्रायोगिक तर्क और तर्कों के दायरे में नहीं आतीं।
 
Lord Krishna's pastimes are imbued with supernatural and divine power. The hallmark of such pastimes is that they are beyond the scope of logic.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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