श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 18: महाप्रभु का समुद्र से बचाव  »  श्लोक 77
 
 
श्लोक  3.18.77 
तिन - दशाय महाप्रभु रहेन सर्व - काल ।
‘अन्तर्दशा’, ‘बाह्य - दशा’, ‘अर्ध - बाह्य’ आर ॥77॥
 
 
अनुवाद
भगवान हर समय चेतना की तीन विभिन्न अवस्थाओं में से एक में रहते थे: आंतरिक, बाह्य और अर्ध-बाह्य।
 
Mahaprabhu always remained in one of the three states of consciousness – internal, external and semi-external.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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