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श्री चैतन्य चरितामृत
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श्लोक 76
श्लोक
3.18.76
उठितेइ अस्थि सब लागिल निज - स्थाने ।
‘अर्ध - बाह्ये’ इति - उति करेन दरशने ॥76॥
अनुवाद
जैसे ही वे उठे, उनकी अस्थियाँ अपने स्थान पर आ गईं। अर्ध-बाह्य चेतना से भगवान इधर-उधर देखने लगे।
As he stood up, his bones fell into place. Mahaprabhu looked around with a semi-permanent consciousness.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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