vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य चरितामृत
»
लीला 3: अन्त्य लीला
»
अध्याय 18: महाप्रभु का समुद्र से बचाव
»
श्लोक 68
श्लोक
3.18.68
जालिया कहे , - “प्रभुरे देख्याछों बार - बार ।
तेंहो नहेन, एइ अति - विकृत आकार” ॥68॥
अनुवाद
मछुआरे ने उत्तर दिया, "मैंने भगवान को कई बार देखा है, लेकिन यह वह नहीं हैं। यह शरीर बहुत विकृत है।"
The fisherman replied, "I have seen the Lord many times, but this is not Him. This body is very distorted."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×