श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 18: महाप्रभु का समुद्र से बचाव  »  श्लोक 67
 
 
श्लोक  3.18.67 
‘एबे भय गेल, तोमार मन हैल स्थिरे ।
काहाँ ताँरे उठाञाछ, देखाह आमारे” ॥67॥
 
 
अनुवाद
“अब जब तुम्हारा डर दूर हो गया है और तुम्हारा मन शांत है, तो कृपया मुझे दिखाओ कि वह कहाँ है।”
 
“Now that your fear is gone and your mind is at peace, show me where they are?”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)