श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 18: महाप्रभु का समुद्र से बचाव  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  3.18.58 
एइ भूत नृसिंह - नामे चापये द्विगुणे ।
ताहार आकार देखिते भय लागे मने ॥58॥
 
 
अनुवाद
"तथापि, जब मैं नृसिंह मंत्र का जाप करता हूँ, तो यह भूत मुझ पर दोगुनी शक्ति से विजय प्राप्त कर लेता है। जब मैं इस भूत का रूप भी देखता हूँ, तो मेरे मन में बड़ा भय उत्पन्न हो जाता है।
 
"But this ghost, when I chant the Narasimha mantra, defeats me with double the force. The mere sight of this ghost fills me with intense fear.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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