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श्लोक 3.18.35  |
‘जगन्नाथ देखिते किबा देवालये गेला ? ।
अन्य उद्याने किबा उन्मादे पड़िला ? ॥35॥ |
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| अनुवाद |
| क्या भगवान जगन्नाथ के मंदिर में चले गए हैं, या वे किसी बगीचे में पागल होकर गिर पड़े हैं? |
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| “Has Mahaprabhu gone to the temple of Jagannathji or has he fallen in some garden due to madness? |
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