श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 18: महाप्रभु का समुद्र से बचाव  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  3.18.35 
‘जगन्नाथ देखिते किबा देवालये गेला ? ।
अन्य उद्याने किबा उन्मादे पड़िला ? ॥35॥
 
 
अनुवाद
क्या भगवान जगन्नाथ के मंदिर में चले गए हैं, या वे किसी बगीचे में पागल होकर गिर पड़े हैं?
 
“Has Mahaprabhu gone to the temple of Jagannathji or has he fallen in some garden due to madness?
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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