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श्लोक 3.17.71  |
एइ लीला स्व - ग्रन्थे रघुनाथ - दास ।
गौराङ्ग - स्तव - कल्पवृक्षे कैराछेन प्रकाश ॥71॥ |
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| अनुवाद |
| श्रील रघुनाथ दास गोस्वामी ने अपनी पुस्तक गौरांग-स्तव-कल्पवृक्ष में इस लीला का पूरी तरह से वर्णन किया है। |
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| Srila Raghunatha Dasa Goswami has described this pastime very well in his book Gaurangastava Kalpavriksha. |
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