श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 17: श्री चैतन्य महाप्रभु के शारीरिक विकार  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  3.17.37 
अन्य - कथा, अन्य - मन, बाहिरे अन्य आचरण ,
एइ सब शठ - परिपाटी ।
तुमि जान परिहास, हय नारीर सर्व - नाश,
छाड़ एइ सब कुटीनाटी ॥37॥
 
 
अनुवाद
"हम जानते हैं कि यह सब एक सोची-समझी चाल है। आप स्त्रियों का सर्वनाश करने वाले मज़ाक करना जानते हैं, लेकिन हम समझ सकते हैं कि आपका असली मन, वचन और व्यवहार अलग है। इसलिए कृपया ये सारी चालाकी भरी चालें छोड़ दीजिए।"
 
"We know this is a well-planned ploy. You know how to make jokes that destroy women, but we can sense that your true intentions, words, and behavior are completely different. So please give up these clever tricks."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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