श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 17: श्री चैतन्य महाप्रभु के शारीरिक विकार  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  3.17.30 
स्वरूप - गोसाञि प्रभुर भाव जानिया ।
भागवतेर श्लोक पड़े मधुर करिया ॥30॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु की परमानंद भावनाओं को समझते हुए, स्वरूप दामोदर ने मधुर स्वर में श्रीमद-भागवतम से निम्नलिखित श्लोक का पाठ किया।
 
Knowing the ecstatic mood of Sri Chaitanya Mahaprabhu, Swarup Damodara recited the following verse from Srimad Bhagavatam in a sweet voice.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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