श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 16: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा कृष्ण के अधरों का अमृतपान  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  3.16.39 
सेइ कालिदास यबे नीलाचले आइला ।
महाप्रभु ताँर उपर महा - कृपा कैला ॥39॥
 
 
अनुवाद
जब कालिदास ने जगन्नाथ पुरी, नीलाचल का दौरा किया, तो श्री चैतन्य महाप्रभु ने उन पर बहुत दया की।
 
When this same Kalidasa came to Jagannathpuri i.e. Nilachal, then Sri Chaitanya Mahaprabhu showed great mercy on him.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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