श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 16: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा कृष्ण के अधरों का अमृतपान  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  3.16.23 
ठाकुर कहे, - “ऐछे बात् कहिते ना युयाय ।
आमिनीच - जाति, तुमि सुसज्जन राय” ॥23॥
 
 
अनुवाद
झाड़ू ठाकुर ने उत्तर दिया, "आपको मुझसे यह पूछना उचित नहीं है। मैं एक बहुत ही निम्न जाति के परिवार से हूँ, जबकि आप एक सम्मानित धनी सज्जन हैं।"
 
Jhadu Thakur replied, "It doesn't behove you to ask me for this. I am of a very low caste, while you are a respectable wealthy gentleman."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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