श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 15: श्री चैतन्य महाप्रभु का दिव्य उन्माद  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  3.15.35 
आम्र, पनस, पियाल, जम्बु, कोविदार ।
तीर्थ - वासी सबे, कर पर - उपकार ॥35॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने आगे कहा, "हे आम के वृक्ष, हे कटहल के वृक्ष, हे पियाल, जम्बू और कोविदार वृक्ष, तुम सभी पवित्र स्थान के निवासी हो। इसलिए कृपया दूसरों के कल्याण के लिए कार्य करो।"
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu continued, "O mango tree, O jackfruit tree, O piyal, jambu, and kovidara trees, you are all residents of this holy place. Therefore, please work for the welfare of others.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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