श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 15: श्री चैतन्य महाप्रभु का दिव्य उन्माद  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.15.2 
जय जय श्री कृष्ण - चैतन्य अधीश्वर ।
जय नित्यानन्द पूर्णानन्द - कलेवर ॥2॥
 
 
अनुवाद
भगवान श्री कृष्ण चैतन्य की जय हो! भगवान नित्यानंद की जय हो, जिनका शरीर सदैव दिव्य आनंद से परिपूर्ण रहता है!
 
All hail Lord Sri Krishna Chaitanya, the Supreme Personality of Godhead! All hail Lord Nityananda, whose body is filled with transcendental bliss!
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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