श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 14: श्री चैतन्य महाप्रभु का कृष्ण-विरह भाव  »  श्लोक 75
 
 
श्लोक  3.14.75 
स्वरूप कहे, - ‘उठ, प्रभु, चल निज - घरे ।
तथाइ तोमारे सब करिमु गोचरे’ ॥75॥
 
 
अनुवाद
स्वरूप दामोदर ने कहा, "हे प्रभु, उठिए। आइए, हम आपके धाम चलें। वहाँ मैं आपको सब कुछ बताऊँगा जो हुआ है।"
 
Swarupa Damodara said, "O Lord, please get up. Let us go to your place. There I will tell you everything that has happened."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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