श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 14: श्री चैतन्य महाप्रभु का कृष्ण-विरह भाव  »  श्लोक 72
 
 
श्लोक  3.14.72 
एइ लीला महाप्रभुर रघुनाथ - दास ।
‘गौराङ्ग - स्तव - कल्पवृक्षे’ करियाछे प्रकाश ॥72॥
 
 
अनुवाद
श्रील रघुनाथ दास गोस्वामी ने अपनी पुस्तक गौरांग-स्तव-कल्पवृक्ष में इन लीलाओं का विस्तार से वर्णन किया है।
 
Srila Raghunatha Dasa Goswami has described these pastimes in detail in his book Gauranga Stava Kalpavriksha.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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