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श्लोक 3.14.67  |
चर्म - मात्र उपरे, सन्धि आछे दीर्घ ह ञा ।
दुःखित ह - इला सबे प्रभुरे देखिया ॥67॥ |
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| अनुवाद |
| ऐसा प्रतीत होता था कि उनके बढ़े हुए जोड़ों पर केवल त्वचा ही ढँकी हुई थी। भगवान की यह दशा देखकर सभी भक्त अत्यंत दुःखी हुए। |
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| It appeared as if only skin covered their elongated joints. |
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