|
| |
| |
श्लोक 3.14.58  |
रामानन्द - राय तबे गेला निज घरे ।
स्वरूप - गोविन्द दुँहे शुइलेन द्वारे ॥58॥ |
|
| |
| |
| अनुवाद |
| तब रामानन्द राय घर लौट आये और स्वरूप दामोदर गोस्वामी और गोविन्द श्री चैतन्य महाप्रभु के कक्ष के द्वार के सामने लेट गये। |
| |
| Then Ramanand Rai returned home and Swarup Damodara Goswami and Govinda lay down in front of the door of Sri Chaitanya Mahaprabhu's room. |
| ✨ ai-generated |
| |
|