श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 14: श्री चैतन्य महाप्रभु का कृष्ण-विरह भाव  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  3.14.53 
चिन्तात्र जागरोद्वेगौ तानवं मलिनाङ्गता ।
प्रलापो व्याधिरुन्मादो मोहो मृत्युर्दशा दश ॥53॥
 
 
अनुवाद
"कृष्ण से वियोग के फलस्वरूप उत्पन्न होने वाले दस शारीरिक परिवर्तन हैं - चिंता, जागृति, मानसिक व्याकुलता, दुर्बलता, अस्वच्छता, पागलों की तरह बोलना, रोग, उन्माद, मोह और मृत्यु।"
 
“There are ten physical disorders arising from separation from Krishna – anxiety, awakening, excitement, weakness, malaise, delirium, disease, madness, attachment and death.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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