श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 14: श्री चैतन्य महाप्रभु का कृष्ण-विरह भाव  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  3.14.37 
‘पाइलुँ वृन्दावन - नाथ, पुनः हाराइलुँ ।
के मोर निलेक कृष्ण? काहाँ मुइ आइनु’? ॥37॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने कहा, "मुझे वृन्दावन के स्वामी कृष्ण मिल गए, पर मैं उन्हें फिर से खो बैठा हूँ। मेरे कृष्ण को कौन ले गया? मैं कहाँ आ गया?"
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu said, "I found Lord Krishna of Vrindavan, but I have lost him again. Who took my Krishna? Where have I come?"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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