श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 14: श्री चैतन्य महाप्रभु का कृष्ण-विरह भाव  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  3.14.20 
देखि’ प्रभु सेइ रसे आविष्ट हैला ।
‘वृन्दावने कृष्ण पाइनु’ - एइ ज्ञान कैला ॥20॥
 
 
अनुवाद
यह देखकर श्री चैतन्य महाप्रभु रास नृत्य की दिव्य मधुरता से अभिभूत हो गए और उन्होंने सोचा, "अब मैं वृन्दावन में कृष्ण के साथ हूँ।"
 
Seeing this, Sri Chaitanya Mahaprabhu was overwhelmed with the divine essence of the Rasa dance and thought, “Now I am in Vrindavan with Krishna.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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