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श्लोक 3.14.13  |
उद्धव - दर्शने यैछे राधार विलाप ।
क्रमे क्रमे हैल प्रभुर से उन्माद - विलाप ॥13॥ |
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| अनुवाद |
| जब उद्धव वृन्दावन आये तो श्रीमती राधारानी का विलाप धीरे-धीरे श्री चैतन्य महाप्रभु के दिव्य उन्माद का एक लक्षण बन गया। |
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| Srimati Radharani's grief gradually became a part of Sri Chaitanya Mahaprabhu's transcendental ecstasy when Uddhava came to Vrindavan. |
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