श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 14: श्री चैतन्य महाप्रभु का कृष्ण-विरह भाव  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  3.14.12 
कृष्ण मथुराय गेले, गोपीर ये दशा हैल ।
कृष्ण - विच्छेदे प्रभुर से दशा उपजिल ॥12॥
 
 
अनुवाद
जब श्री चैतन्य महाप्रभु को कृष्ण से वियोग हुआ, तो उनकी स्थिति ठीक वैसी ही थी जैसी कृष्ण के मथुरा चले जाने के बाद वृन्दावन में गोपियों की थी।
 
When Sri Chaitanya Mahaprabhu was tormented by the separation from Krishna, his condition became like that of the Gopis in Vrindavan when Krishna went to Mathura.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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