श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 14: श्री चैतन्य महाप्रभु का कृष्ण-विरह भाव  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.14.11 
ताते विश्वास क रि’ शुन भावेर वर्णन ।
ह - इबे भावेर ज्ञान, पाइबा प्रेम - धन ॥11॥
 
 
अनुवाद
कृपया चैतन्य महाप्रभु के आनंदमय भावों का यह वर्णन श्रद्धापूर्वक सुनें। इस प्रकार आपको उनके आनंदमय प्रेम का ज्ञान होगा और अंततः आपको भगवद्प्रेम की प्राप्ति होगी।
 
Please listen with devotion to this description of Sri Chaitanya Mahaprabhu's feelings of love. This way you will understand his passion and ultimately attain love for God.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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