श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 14: श्री चैतन्य महाप्रभु का कृष्ण-विरह भाव  »  श्लोक 100
 
 
श्लोक  3.14.100 
उच्च सङ्कीर्तन करे प्रभुर श्रवणे ।
शीतल जले करे प्रभुर अङ्ग सम्मार्जने ॥100॥
 
 
अनुवाद
भक्तों ने श्री चैतन्य महाप्रभु के पास ऊंचे स्वर में हरे कृष्ण मंत्र का जाप किया और उनके शरीर को ठंडे जल से धोया।
 
The devotees started chanting the Hare Krishna mantra loudly near Sri Chaitanya Mahaprabhu and bathed his body with cool water.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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