श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 13: जगदानन्द पण्डित तथा रघुनाथ भट्ट गोस्वामी के साथ लीलाएँ  »  श्लोक 97
 
 
श्लोक  3.13.97 
रामदास कहे , - ”आमि शूद्र अधम! ।
‘ब्राह्मणेर से वा’, - एइ मोर निज - धर्म ॥97॥
 
 
अनुवाद
रामदास ने उत्तर दिया, "मैं शूद्र हूँ, एक पतित आत्मा। ब्राह्मण की सेवा करना मेरा कर्तव्य और धार्मिक सिद्धांत है।"
 
Ramdas replied, "I am a Shudra, a fallen person. Serving a Brahmin is my duty and religion.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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