श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 13: जगदानन्द पण्डित तथा रघुनाथ भट्ट गोस्वामी के साथ लीलाएँ  »  श्लोक 96
 
 
श्लोक  3.13.96 
“तुमि बड़ लोक, पण्डित, महा - भागवते ।
सेवा ना करिह, सुखे चल मोर साथे” ॥96॥
 
 
अनुवाद
रघुनाथ भट्ट ने कहा, "आप एक आदरणीय सज्जन, विद्वान और महान भक्त हैं। कृपया मेरी सेवा करने की कोशिश न करें। बस प्रसन्नचित्त होकर मेरे साथ आइए।"
 
He said, “You are a respected gentleman, a learned scholar and a great devotee.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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