श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 13: जगदानन्द पण्डित तथा रघुनाथ भट्ट गोस्वामी के साथ लीलाएँ  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  3.13.65 
महाप्रभुर सन्देश कहिला सनातने ।
‘आमिह आसितेछि, रहिते करिह एक - स्थाने’ ॥65॥
 
 
अनुवाद
इसलिए जगदानंद पंडित ने सनातन गोस्वामी को भगवान का संदेश दिया: "मैं भी वृंदावन आ रहा हूं; कृपया मेरे रहने के लिए जगह की व्यवस्था करें।"
 
So Jagadananda Pandit gave this message from Mahaprabhu to Sanatana Goswami, "I am also coming to Vrindavan. Please arrange a place for me to stay."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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