श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 13: जगदानन्द पण्डित तथा रघुनाथ भट्ट गोस्वामी के साथ लीलाएँ  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  3.13.62 
पाक क रि’ जगदानन्द चैतन्ये समर्पिला ।
दुइ - जन व सि’ तबे प्रसाद पाइला ॥62॥
 
 
अनुवाद
जब जगदानंद पंडित ने खाना बनाना समाप्त कर लिया, तो उन्होंने श्री चैतन्य महाप्रभु को भोजन अर्पित किया। फिर उन्होंने और सनातन गोस्वामी ने बैठकर प्रसाद खाया।
 
When Jagadananda Pandit had finished preparing the food, he offered it to Sri Chaitanya Mahaprabhu. He and Sanatana Goswami then sat down and began to partake of the prasad.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)