श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 13: जगदानन्द पण्डित तथा रघुनाथ भट्ट गोस्वामी के साथ लीलाएँ  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  3.13.59 
ऐछे चैतन्य - निष्ठा योग्य तोमाते ।
तुमि ना देखाइले इहा शिखिब के - मते? ॥59॥
 
 
अनुवाद
"श्री चैतन्य महाप्रभु में यह श्रद्धा आपके लिए सर्वथा उपयुक्त है। जब तक आप स्वयं इसका प्रदर्शन नहीं करेंगे, मैं ऐसी श्रद्धा कैसे सीख पाऊँगा?"
 
"This devotion to Sri Chaitanya Mahaprabhu suits you perfectly. Unless you demonstrate it, how can I learn such devotion?"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)