श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 13: जगदानन्द पण्डित तथा रघुनाथ भट्ट गोस्वामी के साथ लीलाएँ  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  3.13.58 
सनातन कहे _“साधु पण्डित - महाशय! ।
तोमा - सम चैतन्येर प्रिय केह नय ॥58॥
 
 
अनुवाद
सनातन गोस्वामी बोले, "मेरे प्रिय जगदानंद पंडित, आप एक महान विद्वान संत हैं। श्री चैतन्य महाप्रभु को आपसे अधिक प्रिय कोई नहीं है।"
 
Sanatana Goswami said, "O Jagadananda Pandit, you are a great learned sage. There is no one more dear to the Lord than you.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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