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श्लोक 3.13.57  |
अन्य सन्यासीर वस्त्र तुमि धर शिरे ।
कोन् ऐछे हय , - इहा पारे सहिबारे ?” ॥57॥ |
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| अनुवाद |
| "फिर भी, तुमने एक दूसरे संन्यासी द्वारा दिए गए कपड़े से अपना सिर बाँध लिया है। ऐसा व्यवहार कौन सहन कर सकता है?" |
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| "Yet you've tied the cloth given to you by another monk on your head. Who can tolerate such behavior?" |
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