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श्लोक 3.13.51  |
सनातन सेइ वस्त्र मस्तके बान्धिया ।
जगदानन्देर वासा - द्वारे वसिला आसिया ॥51॥ |
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| अनुवाद |
| सनातन गोस्वामी जब जगदानंद पंडित के दरवाजे पर आये और बैठ गये तो उन्होंने अपने सिर पर यह कपड़ा बांध रखा था। |
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| Sanatana Goswami tied this cloth on his head and went and sat at the door of Jagadanand Pandit. |
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