श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 13: जगदानन्द पण्डित तथा रघुनाथ भट्ट गोस्वामी के साथ लीलाएँ  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  3.13.51 
सनातन सेइ वस्त्र मस्तके बान्धिया ।
जगदानन्देर वासा - द्वारे वसिला आसिया ॥51॥
 
 
अनुवाद
सनातन गोस्वामी जब जगदानंद पंडित के दरवाजे पर आये और बैठ गये तो उन्होंने अपने सिर पर यह कपड़ा बांध रखा था।
 
Sanatana Goswami tied this cloth on his head and went and sat at the door of Jagadanand Pandit.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)