श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 13: जगदानन्द पण्डित तथा रघुनाथ भट्ट गोस्वामी के साथ लीलाएँ  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  3.13.47 
सनातन भिक्षा करेन याइ’ महावने ।
कभु देवालये, कभु ब्राह्मण - सदने ॥47॥
 
 
अनुवाद
सनातन गोस्वामी महावन के आसपास के इलाकों में घर-घर जाकर भिक्षा माँगते थे। कभी वे किसी मंदिर में जाते, तो कभी किसी ब्राह्मण के घर।
 
Sanatana Goswami went from door to door around Mahavana, begging for alms. Sometimes he would go to a temple, sometimes to a Brahmin's house.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd