श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 13: जगदानन्द पण्डित तथा रघुनाथ भट्ट गोस्वामी के साथ लीलाएँ  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  3.13.39 
शीघ्र आसिह, ताहाँ ना रहिह चिर - काल ।
गोवर्धने ना चड़िह देखिते ‘गोपाल’ ॥39॥
 
 
अनुवाद
"तुम्हें वृंदावन में थोड़े समय के लिए ही रहना चाहिए और फिर जितनी जल्दी हो सके यहाँ लौट आना चाहिए। और गोपाल विग्रह के दर्शन के लिए गोवर्धन पर्वत पर मत चढ़ना।
 
"You should stay in Vrindavan for a short time and then return as soon as possible. And do not climb Mount Govardhana to see the Gopala Deity.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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