श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 13: जगदानन्द पण्डित तथा रघुनाथ भट्ट गोस्वामी के साथ लीलाएँ  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  3.13.24 
जगदानन्द कहे प्रभुर धरिया चरण ।
पूर्व हैते इच्छा मोर याइते वृन्दावन ॥24॥
 
 
अनुवाद
भगवान के चरण पकड़ कर जगदानंद पंडित ने कहा, "मैं बहुत दिनों से वृन्दावन जाने की इच्छा रखता था।
 
Then Jagadananda Pandit, holding the feet of Mahaprabhu, said, “I have been wanting to go to Vrindavan for a long time.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)