श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 13: जगदानन्द पण्डित तथा रघुनाथ भट्ट गोस्वामी के साथ लीलाएँ  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  3.13.23 
प्रभु कहे,_“मथुरा याइबा आमाय क्रोध क रि’ ।
आमाय दोष लागा ञा तुमि ह - इबा भिखारी” ॥23॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने बड़े स्नेह से कहा, "यदि तुम मथुरा जाकर मुझ पर क्रोधित होगे, तो तुम केवल एक भिखारी बन जाओगे और मेरी आलोचना करोगे।"
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu said very affectionately, “If you remain angry with me while going to Mathura, you will become a mere beggar and will insult me.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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